"भावनाओं से भाग्य बदल जाते है ,ये वाक्य बहुत जगह पढ़ा पर जब खुद आजमाया तब ऐसा लगा कि सचमुच ये बात जीवन के हर क्षेत्र में लागू होती है जब जीवन में अप्रिय नकारात्मक घटना घट जाती है तो हमारा जीवन निराशा से भर उठता है हम दुःख की भावना को स्थाई जगह अपने जीवन में दे देते है ,और हर परिस्थिति एवम घटना को उसी से जोड़ कर नकारात्मक विचारो और भावनाओं को ही सच मन लेते है पर जब कुछ अच्छा भी होता है तो उसको थोड़ी देर की ख़ुशी मान कर फिर निराशा की चादर ओढ़ लेते है। '
जीवन में जो होता है वह भले ही पहले से निश्चित हो अच्छा या बुरा पर मयने तो इस बात के है कि आप उस पर प्रतिक्रिया कैसी है " आज जीवन में सबसे ज्यादा इसी बात की जरुरत है कि हम अपनी भावनाओं को समझे और जीवन में सही तरीके से उनका उपयोग करे तो बहुत सी समस्याएं तो यु ही सुलझ जाएँगी जैसे कि कभी आप सुबह लेट उठे और फिर आपके मन में विचार आया कि अरे अब सब गड़बड़ होगी और एक के बाद एक गड़बड़ होती जाती है और आप सोचते हो मैंने तो कहा था कि ऐसा ही होगा। सच में आप
सही है आप जो कहते है वही होता है आपकी भावना बहुत प्रबल होती है उसको आप को नियंत्रित करना होगा। आप के साथ रोज़ के जीवन में ही धीरे धीरे आप को अपनी भावना पर काबू पाना होगा एक बार जब आप अपनीभावना को समझ ने लगेंगे तो आप अहसास की भावनाओ के बदलने से बहुत सी परेशानिया तो जीवन में है ही नहीं उनको हमने खुद ही नकारात्मकता की वजह से अपने जीवन में स्थान दे दिया है. जैसे कोई अगर हमसे या हमारी अच्छी बात करता है तो वो हम दो-चार दिनों में भूल जाते है लेकिन यदि कोई हमसे कड़वा बोलता है या कोई हमारी बुराई बताता है तो हम उसे दो-चार साल तक या जब तक पलट कर जबाब न देदे तब याद रखते है यही गलत है क्योकि इस वजह से हम अपने जीवन के अनमोल पलों को यु ही जाया कर देते है ये सोचने में कि उसने मेरे बारे में ये क्यों कहा और भी कई बाही तों पर उस बात का नकारात्मक असर होता है। इसलिए हमे अपनी भावनाओँ को सकारात्मकता की दिशा में मोड़ कर जीवन को आसान बनब चाहिए।
"जीवन बहुत ही आसान है जब तक कि उसमे नकारात्मक विचार और भावनाओ का दखल ज्यादा नहीं है और जैसे ही हम अपने जीवन में इन बेकार की बातों को ज्यादा तबज़्ज़ो देने लगते है हम अपने ही आसपास एक दीवार बना लेते है जिसका असर हमारे जीवन के हर क्षेत्र चाहे वह आर्थिक हो या पारिवारिक और चाहे सामाजिक हो या आध्यात्मिक हर क्षेत्र में हम अपने को कमजोर पाते है यही तो भावनाओ का खेल है। ....... ....... इसलिए विलियमजेनिंग्स ब्रायन का ये कथन है कि 'भाग्य संयोग से नहीं बनता। यह तो आपके विचारों के चयन से बनता है "{विलियम जेनिंग्स ब्रायन }{अमेरिकी नेता ]जीवन पर शतप्रतिशत लागू होता है।