शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

avchetan me kitabon ki baaten

"जब से हिंदी पढ़ना सीखा तब से पता नहीं क्या,और कितना पढ़ा पर जो पढ़ा वह कभी न कभी कहीं न कहीं याद आ ही जाता है। छोटी -छोटी कहानियाँ  हो या कोई लेख जब भी कोई ऐसा वक़्त हो तो हमारा अवचेतन उन कहानी और उस घटना मे समानता ढूंढने की कोशिश  जरूर करता है ,पिछले साल बेटे को हिन्दी पढ़ाते हुए उसका एक  पाठ  'प्रेमचंद के फटे जूते ' पता नहीं क्यों मन के किसी कोने में समां गई ,शायद हरिशंकर परसाई जी की रचना है ,तब से हर समय हर एक बात में अपने मन में ये बात सोचती हूँ कि क्या सम्भावना हो सकती कितने विचार इस परिस्थिति में किसी के मन में आ सकते  है ,अब जब की इतने दिनों बाद फिर उस लेख की कुछ बातें मन में आ रही है  क्योंकि आज कही जाते -जाते मेरी भी चप्पल टूट गई और मुझे अपने आप पर बड़ा गुस्सा आया की पहले क्यों नहीं देखा ,अब क्या-क्या परेशानी हो सकती है कितना समय बर्बाद होगा। .. बगैरह -बगैरह और ये सब सोचते -सोचते में मन कब प्रेमचंद के फटे जूते के बारे में सोचने लगा पता ही नहीं चला। फिर अपने आप ही बड़ी हँसी आई। हा हा हा हा : एक तरफ तो हाथ जल्दी -जल्दी  काम निपटा रहे है दिमाग ये सोच रहा की अब क्या करू  और मन में तो उस वक्त और बर्तमान में तुलना करके  अपने ही में मस्त था । परसाई जी ने तो प्रेमचंदजी की एक तस्वीर को देखकर उस वक्त की सारी अच्छाई और परेशानिया का ज़िक्र ऐसे कर दिया की सबकुछ इन्ही के सामने घटित हुआ है.i पर क्या हम भी किसी परिस्थिति को देखकर उसका विश्लेषण कुछ हट कर नहीं कर सकते।   ... 
             अरे अरे मेरा मन तो आज में आ ही नहीं रहा पर अभी तो सबसे जरुरी काम है अपनी चप्पल की व्यवस्था करना वरना बाहर जाने का प्रोग्राम ही निरस्त न करना पद जाये। .... 
       ये बात सच है कि हमारा मन हमे किसी परिस्थिति को कुछ अलग तरह से सोचने की और मोड़ता है बस ये हमारे ऊपर निर्भर करता है की हम स्थिति से कैसे बहार आये। ..... 

सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

"विचारों से ही हमारा व्यक्तित्व बनता है। हमारे जैसे विचार अवचेतन मन में चलते है , वही विचार  हमारे आने वाले  कल का निर्माण करते है। हर एक का अपना  एक नज़रिया होता है ,जिस तरह वो  अपने आसपास की हर घटना को अपने मन -मस्तिष्क में जिस भी तरह से ग्रहण करता है , वो अलग होता  है और बाहर के लिए वह एक अलग द्रष्टिकोण रखता है।"
             "अवचेतन मन में हमेशा अलग विचार चलते  रहते है ,हमारा  अवचेतन बहुत शक्तिशाली है वो हर परिस्थिति को अपने हिसाब से ढाल लेता है ,या यूँ कहे कि अवचेतन मन में जिस घटना को जिस रूप में अपनाया है ,उसी पर हमारा भविष्य टिका होता है  , हमारे अवचेतन पर वही अंकित  होता  है जैसा  वो  महसूस करता है जब से हम सोचने लगते है ,तभी  से  हमारे मन -मस्तिष्क में  एक प्रक्रिया  के तहत  धारणा बन जाती है और वो हमारे अवचेतन में हर घटना को  अपने एक  सकारात्मक या नकारात्मक नज़रिये का जामा पहना कर उस घटना को बहुत बड़ी या छोटी बनालेता है , हमारा जीवन इसी बात पर निर्भर करता  है कि हमारे रोज़ की दिनचर्या में जो भी घटित हो रहा है उसको हमारा अवचेतन मन किस रूप में ले  रहा है।
               अवचेतन मन में हमेशा भूतकाल की घटनाओं का प्रभाव रहता है उसी पर आपका व्यक्तित्व बनता है जैसे किसी के बचपन में कोई अपना मृत्यु को प्राप्त हो जाये तो या वह मृत्यु से डरने लगेगा या मृत्यु को जीवन का एक हिस्सा समझ कर उसे स्वीकार कर लेगा। उसी तरह हर अच्छी या बुरी घटना को हमारा मन कैसे स्वीकार करता है ,यही नजरिया हमारे भविष्य  की सफ़लता और असफ़लता में भूमिका निभाता है। "
                जब हम पढ़ते है ,जब हम सोते है जब हम घूमने जाते है या हम यूँ कह सकते है कि हमारा अवचेतन मन हमसे अलग़ हमेशा अपनी दुनिया में मशगूल रहता है। ,

शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

avchetan man

"केवल एक विचार ही आपका जीवन बना या बिगाड़ सकता है। "
"विचार कर्म का बीज है "
बरसों या दशको या यूगों से भी पहले जब पृथ्वी पर जीवन था या नही !या जीवन की शुरूआत होने वाली थी
तब उस परम शक्ति ने विचार किया होगा I हाँ विचार ही तो पहले आया होगा तभी तो सृष्टि की ,ब्रम्हांड की ,
पृथ्वी की और सौर मण्डल में जीवन की उत्पत्ती हुई होगी I विचारों के बल पर ही ब्रह्मांड की रचना हुई होगी
रचना हुई सृष्टि की , भौतिक विश्व से पहले सृष्टि के  रचयिता ने विचारों में ब्रह्मांड की रचना की।
ब्रह्मांड की रचना या भौतिक जगत का निर्माण विचारों ही हुआ l
              यही रचनात्मक सिद्धान्त है "विश्व में किसी भी वस्तु का भौतिक निर्माण होने से पहले उसका वैचारिक निर्माण  होता है "l
           हाँ यही सत्य है  आप अपने विचारों से अपने ब्रम्हांड या कहे की अपना जीवन बना सकते है अच्छे या
बुरे पर   जैसे आपके विचार होंगे वैसा ही आपका जीवन का स्वरूप होगा आपके विचारों की शक्ति आपके जीवन के हर   क्षेत्र में आपकी स्थिति तय करती है ,आपका जीवन जैसा भी है सफल या संघर्षपुर्ण ये एकमात्र आपके
विचारों के कारण ही होता है
              हाँ ये हमारे और सिर्फ हमारे विचारों का परिणाम है कि हम कैसा जीवन जी रहे है हर हाल में ख़ुश या
हर समय चिंता से भरे हुए l
हमे हमारे मन के विचारों को परखना होगा ये क्या  है, कैसे है, जब हम अपने विचारों के दृष्टा बनकर उन्हें जानेंगे तब हम समझेंगे की सचमुच हमारे विचार ही हमारे भविष्य की सीढी है !हमारे मन या कहें की अवचेतन मन की देन है हमारा भविष्य
                   " विचारोँ से भावना बनती और भावना से भविष्य "