"सुबह उठते ही हाथ मशीन की तरह और दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलता है ,फिर भी समय की कमी हमेशा बनी रहती है क्या कुछ नहीं करती वो समय से जीतने की। हर रोज़ पर समय है कि उसको हमेशा मात दे वो देता है ,और वो चुपचाप फिर नई कोशिश करने में जुट जाती है। आज भी यही हो रहा था सुबह से और उसका मन तो कहीं और ही छलांगे लगा रहा था ,एक मन में रोज़ की रूटीन का मेनू चल रहा है और एक मन में तो जाने क्या चल रहा था ,खुश तो आज वो बहुत है पर क्यों ये तो उसका मन जाने या कहें अवचेतन में आज की तारीख को फिर याद करके जाने कितने नए विचार आ गए। आज से शायद 20 साल या कहें जब से उसे याद है उसने पहली बार अपने पिता को सत्यनारायण की कथा सुनाई थी और उन्होंने उसे 11 रूपये देकर कहा था खूब विद्या आये तुम्हारे पास और बस उसने किताबों से बड़ी गहरी दोस्ती कर ली थी। पिता के घर किताबों की कोई कमी नहीं थी। और उसको पढ़ने का शौक इस कदर था की , खाना -पीना ही भूल जाय , ज्योतिष,पुराण ,कीरो, ओशो मासिक पत्रिकायें हो या अपने कक्षा की किताबें सब को घोल कर पिने का जूनून था कभी सोचा नहीं की इनके बहार भी दुनिया है। जब हस्तरेखा ज्योतिष पढ़ी तो मन पढाई से हट गया ,पर कहीं और तो मन लगता ही नहीं फिर क्या करें तब पिता ने उदासी का कारण जान कर पास बिठाया और पूछा क्या हुआ तो उसने रोते हुए बताया की उसके हाथ में विद्या की रेखा नहीं है। ज्योतिष पिता ने हाथ पकड़ कर एक रेखा खींच दी और बोले ये रही विद्यारेखा, रेखाओं से कुछ नहीं होता कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है पाने घर में इतनी किताबें है की तुम पढ़ते पढ़ते थक जाओ पर वो ख़त्म नहीं होंगी इनको पढ़ो। रही बात डिग्रीयो की तो डिग्रीयां ज्ञान नहीं देती ,ज्ञान किताबों में है और पढ़ करा उसे प्राप्त कारण आदमी के बस में। 10 साल की लड़की के कितने समझ में आया पता नहीं पर ये बातें उसके अवचेतन मन में हमेशा के लिए बैठ गई और वो किताबों की हमेशा -हमेशा की दोस्त हो गई ,आज जब चैत्र पूर्णिमा आई तो25 साल पहली की घटना यु मन के किसी कोने से सामने आ कर कड़ी हो गई जैसे कल की बात हो औरउसका मन इतना खुश है की पिता की गैरमौजूदगी का अहसास भी इस ख़ुशी को काम नहीं कर पाई क्योकि इन्ही किताबों कारण ही तो पिता उसके अवचेतन में अभी भी बसें हुए है और उसका एक मन बेटी बन कर हमेशा अपने पिता की इस सीख को सबके साथ बाटता रहता है। .........
....... ारे अरे ये क्या सब्जी जल जाएगी उसके एक मन ने उसे वापस रोज़ की दुनिया में खींच लाया और एक मन फिर खुश हो कर सोचने लगा की आज अधूरी किताब पूरी कारण है सब काम के बाद और उसके हाथ जल्दी -जल्दी काम निपटाने लगे। ........ ....... उसकी दोनों मन साथ साथ खुशी से मुस्काने लगे। .........
....... ारे अरे ये क्या सब्जी जल जाएगी उसके एक मन ने उसे वापस रोज़ की दुनिया में खींच लाया और एक मन फिर खुश हो कर सोचने लगा की आज अधूरी किताब पूरी कारण है सब काम के बाद और उसके हाथ जल्दी -जल्दी काम निपटाने लगे। ........ ....... उसकी दोनों मन साथ साथ खुशी से मुस्काने लगे। .........
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