गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

MAN KI BATIEN ,MAN HI JAANE.

"मन के कितने रूप है ये कोई कैसे जान सकता है ,जब भी समझने की कोशिश करो कुछ अलग ही समझ मिली मेरे मन की जाने कौन से लेकर मन की गति मन ही जाने तक की बातें बस मन ही करता है."                                    मन से आज फिर एक औरत का मन माँ के मन से फिर बहस हुई और माँ का मन जीत गया  ओरत फिर एक कोने में खड़ी देखती रह गई।........ मन के किसी कोने में फिर एक याद ने करवट ली और ओरत का मन फिर बेटी के मन से उलझ गया और फिर एक बेटी के मन की जीत हो गई ,बेटी इठलाती हुई आगे बढ़ गई और औरत का मन चुप -चाप देखता रहा।  ........ मन का आज फिर मन से समझौता हुआ आज फिर पत्नी ने औरत के मन को समझ दिया औरत का मन फिर किसी कोने में नहीं था बस मन के हर कोने में एक और मन था।
एक बेटी का मन ,एक माँ का मन ,एक पत्नी का मन। हाँ मन के हर मन में औरत ने अपने मन को मिला दिया और सब को मिला कर एक प्यारा सा मन बन गया जिसे दुनिया में कोई आज तक समझ नहीं सका जितना औरत के मन को समझने की कोशिश हुई उतने ही अविष्कार हो गए। कभी किसी ने औरत के मन को मोम कहा तो कभी बहता दरिया ,पर औरत का मन  हर कोई कैसे समझे  महादेवी वर्मा की लछमा का मन कोण समझ सकता है जब की आज भी हर औरत में वो थोड़ी सी बाकि है , प्रेमचंद की सुभागी भी तो हर बेटी के मन में बसी है चाहे एक गरीब की बेटी हो या आमिर की हर बेटी का सपना सुभागी की तरह ही है में ऐसा कुछ कर की मेरे पिता का सर गर्व से तन जाये आसमान के तारों से भी ज्यादा खुशियाँ हो मेरे पिता के आँगन में। ......
       और माँ की तो बात ही निराली है हर माँ का मन अपने  बच्चो की उन्नती को देखने की आस लगाए बैठा रहता है ,, किसी कोने में ये आस होती है जो मैंने नहीं किया वो मेरी संतान करेगी और बस यही से बस जिंदगी की शुरुआत और यही मन की आस के साथ जिंदगी को विराम पर नहीं औरत का मन कभी आस लगाना नहीं छोड़ता फिर एक नै आस एक नया विस्वास की अब सब मेरे मन के मुताबिक होगा। ..... मन फिर नई  गति से चल देता है अपना एक नया रूप लेकर कभी माँ का कभी बेटी का , या किसी और रूप में ही जिंदगी की रफ़्तार के साथ कदम मिलाने की उम्मीद के साथ। .......  मन की इस बात पर मन ने फिर मन से कहा की आज कुछ काम का मन नहीं है मन ने फिर  कहा ऐसा कैसे हो की काम न करना पड़े अब चलो अब कुछ काम करे मन। ........ 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें