''जब स्त्री शिक्षा की बात करे तो केवल हम स्कूल -कालेज की डिग्रीयों से ही नहीं अपितु व्यावहारिक ज्ञान के साथ ही निर्णय लेने की क्षमता और सही समय पर सही काम करने का गुण भी उसके व्यक्तित्व का एक अभिन्न हिस्सा माना जाता है जब किसी स्त्री के पास भले ही डिग्री न हो पर बाकि गुण होने से वह हर क्षेत्र में सफल होने में सक्षम होती है। स्त्री की शिक्षा का रूप समय के हिसाब से बदलता रहा है ,जब प्राचीन काल में बहुत प्रतियोगता नहीं थी केवल जीवन के मूल्य ही प्राथमिक शिक्षा का रूप था और जब एक स्त्री को जीवन -मूल्य की अहमियत ज्ञात हो तो पूरा परिवार ही सही दिशा में प्रगति करता है ,परिवार के बच्चो में भी उन्ही गुणों का विकास सहज ही हो जाता है ,इसलिए महिलाये अपने परिवार की सभी अन्य महिलाओँ को सभी तरह की शिक्षा और गुण सिखाने की पुरी कोशिश करती है क्योकि कहा भी गया है एक पुरुष यदि किसी भी तरह का ज्ञान प्राप्त करता है तो वह केवल उस तक सीमित होता है परंतु यदि एक स्त्री वही ज्ञान प्राप्त करती है तो साथ -साथ अपने बच्चो और परिवार के साथ ही वह कोशिश करती है की एक दो और स्त्री भी वह ज्ञान बिना किसी शुल्क के उसके द्वारा ही प्राप्त करले ये स्त्री की कंजूसी नहीं कहलाती बल्कि ये देने की पृवत्ति है जो उसको बचपन से ही सिखाया जाता है की सबको साथ लेकर चलना है। इन सब जीवन मूल्यों को तो स्त्री के जीवन का अभिन्न हिस्सा होना ही चाहिए साथ ही समय केअनुसार शिक्षा प्राप्त कर वह नए ज़माने की हर तरह के ज्ञान को आत्मसात करके अपने व्यक्तित्व को निखारती जाती है। यही एक स्त्री का नैसर्गिक गुण है जो हर युग में उसे महत्त्वपूर्ण बनाता है।"
स्त्री अपने बुद्धि विवेक से जब निर्णय लेती है तो वह सभी परिस्थितियों को जान कर उसको अमल में लती है इसके लिए उसको किसी डिग्री या सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं होती वह जब घर के लिये निर्णय लेती है तो पुरे परिवार का भला हो ऐसा सकती है, किसी विशेष व्यक्ति का नहीं वहीँ यदि वह देश -समाज या किसी और संस्था का दायित्व अपने ऊपर लेती है तो जीजान से उसको पूर्ण करने का प्रयत्न करती है। यही स्त्री का स्वभाव कहा गया है। ........ ........ स्त्री को सिर्फ स्कूल कॉलेज ही नहीं जीवन के हर क्षेत्र में अपना सर्वश्रेष्ठ देना होता है और हर एक स्त्री अपने पुरे जीवन काल में यही प्रयत्न करती रहती है। .......
स्त्री अपने बुद्धि विवेक से जब निर्णय लेती है तो वह सभी परिस्थितियों को जान कर उसको अमल में लती है इसके लिए उसको किसी डिग्री या सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं होती वह जब घर के लिये निर्णय लेती है तो पुरे परिवार का भला हो ऐसा सकती है, किसी विशेष व्यक्ति का नहीं वहीँ यदि वह देश -समाज या किसी और संस्था का दायित्व अपने ऊपर लेती है तो जीजान से उसको पूर्ण करने का प्रयत्न करती है। यही स्त्री का स्वभाव कहा गया है। ........ ........ स्त्री को सिर्फ स्कूल कॉलेज ही नहीं जीवन के हर क्षेत्र में अपना सर्वश्रेष्ठ देना होता है और हर एक स्त्री अपने पुरे जीवन काल में यही प्रयत्न करती रहती है। .......
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