अवचेतन मन का रहस्य क्या कोई विज्ञानं कोई या अध्यात्म समझा सकता है ,शायद हाँ और शायद नहीं क्योंकि ईश्वर ने जब संसार का निर्माण किया तब ईश्वर के अवचेतन में भी तो पहले इस संसार का निर्माण हो चुका था !उस परम शक्ति ने कितना महान विचार अपने अवचेतन में लाया होगा कि इस संसार के कण -कण का निर्माण हुआ, मनुष्य के एक छोटे से तिनके के समान मन में जब इतने विचार आते है कि एक और संसार का निर्माण हो जाये ,मनुष्य के अपने जीवन में जो घटनाए घटित होती है ,उसके मन में उनको लेकर एक और दुनिया बनती है। जैसे यदि किसी के जीवन में कोई दुःखद घटना घटती है तो उसके सामाजिक जीवन जो बदलाव आता है उसके साथ -साथ उसके अवचेतन मन पर भी प्रभाव बहुत गहरा होता है और मनुष्य अपने मन में अनेको विचार लाता है कि ऐसा हुआ तो क्या होगा ऐसा नही होता तो कुछ और परिस्थिति होती ,मनुष्य के अवचेतन में तो इतने सारे पहलु एक ही घटना के होते है कि वह खुद ही नहीं समझ पाता कि क्या सही है और क्या सिर्फ विचार अवचेतन मन के रहस्य को साधारण मनुष्य समझने के प्रयास में ही उलझा रहता है।
अवचेतन मन की छोटी सी झलक ही साधारण मनुष्य के जीवन में वह देख पाता है अन्यथा वह तो अपनी दिनचर्या की आपाधापी में उसकी उपेक्षा कर आगे की घटनाओं और परिस्थिति पर ध्यान केंद्रित करते है और मनुष्य का अवचेतन मन फिर किसी और घटना या कहानी को अपने ढंग से परिभाषित करके उसी को सत्य की कसौटी पर परखने की कोशिश करने में अपने आप को व्यस्त कर लेता है।
हर एक व्यक्ति जीवन में जो भी घटना घटती है चाहे वह सुख की हो या दुख की उसका अवचेतन में यदि उस घटना को ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया तो उसके भविष्य पर उस का गहरा प्रभाव नज़र आएगा। यदि व्यक्ति ने उस घटना को सकारात्मक रूप से अपनाया है तो आगे भविष्य में उन्नति के या सही मार्ग के अवसर आएंगे और यदि उसके भीतर नकारात्मक विचारों का प्रभाव अधिक है तो ,उसको कठिन परिस्थितियों का अधिक सामना करना पड़ेगा इसीलिए पूर्वजो का कहना रहता था कि "जो होता है अच्छे के लिए होता है "जिससे मनुष्य नकारात्मक परिस्थितियों में भी अच्छा महसूस कर सके। ... ....
अवचेतन मन की छोटी सी झलक ही साधारण मनुष्य के जीवन में वह देख पाता है अन्यथा वह तो अपनी दिनचर्या की आपाधापी में उसकी उपेक्षा कर आगे की घटनाओं और परिस्थिति पर ध्यान केंद्रित करते है और मनुष्य का अवचेतन मन फिर किसी और घटना या कहानी को अपने ढंग से परिभाषित करके उसी को सत्य की कसौटी पर परखने की कोशिश करने में अपने आप को व्यस्त कर लेता है।
हर एक व्यक्ति जीवन में जो भी घटना घटती है चाहे वह सुख की हो या दुख की उसका अवचेतन में यदि उस घटना को ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया तो उसके भविष्य पर उस का गहरा प्रभाव नज़र आएगा। यदि व्यक्ति ने उस घटना को सकारात्मक रूप से अपनाया है तो आगे भविष्य में उन्नति के या सही मार्ग के अवसर आएंगे और यदि उसके भीतर नकारात्मक विचारों का प्रभाव अधिक है तो ,उसको कठिन परिस्थितियों का अधिक सामना करना पड़ेगा इसीलिए पूर्वजो का कहना रहता था कि "जो होता है अच्छे के लिए होता है "जिससे मनुष्य नकारात्मक परिस्थितियों में भी अच्छा महसूस कर सके। ... ....
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