आज महिला दिवस पर हर तरफ़ बड़ा ही अच्छा माहौल बन गया है। अख़बार हो टेलीविज़न के चैनल हर जगह बस महिलाओं की बातें की जा रही है ,कितनी उपलब्धियॉ पाई महिलाओं ने ,कितनी पाई जानी बाकी है अभी और भी जाने क्या -क्या बहुत अच्छा है ये सब वास्तव में महिला हर उस चीज़ या कहे कि हर उस सम्मान और अधिकार की हक़दार है जो कि इस समाज में उपलब्ध है। आज अखबार के पन्ने भरे हुये है महिलाओं की कहानियो से और उसको क्या कितना मिला और कितना मिलना चाहिए।
ये तो हुई बाहर की बाते पर हम यहाँ पर स्त्री के मन से भी परे उसके अवचेतन मन की बात करते है ,जब से दुनिया अस्तित्व में आई तो सबसे पहले कोण आया आदम या हब्बा ये तो कोई खास बात नहीं है शायद दोनों को साथ में प्रभु ने धरती पर भेजा होगा क्योंकि उसको अपनी सृष्टि की रचना में पुरूष के बराबर ही स्त्री के महत्व का भान था। उस परमपिता को कोई संदेह नहीं था अपनी इस अद्भुत रचना पर जो उसकी सृष्टि में बराबर की सहभागी थी और है। हर युग में उसने नारी को हर तरह से सक्षम बनाया है ,नारी को ईश्वर ने अपनी सर्वश्रेष्ठ रचना बताया है। महिलाओ को किसी विशेष दिन में कोई भले ही सम्मान की बात करे पर उस सृष्टि के रचयिता ने एक नारी की कोख़ से जन्म ले लेकर उसको माँ की पदवी दे कर बहुत ही सम्मान दिया है ,उसका कोई मोल नहीं है।
स्त्री का व्यक्तित्व अपने आप में संपुर्ण है उसके अवचेतन में हमेशा ही एक बात रहती है की कैसे अपने परिवार ,समाज ,और देश -दुनिया का भला करू। हर परिस्थिति से उठ कर फिर आगे बढ़ना और सकारत्मकता के साथ हर घटना को सहज रूप से स्वीकारना हर नारी का नैसर्गिक गुण होता है ,महिलाओ की सहज प्रवत्ति है दूसरों की मदद करना। नारी मन के बारे में कवियों को कहने में ही एकअद्भुत रचना का सृजन हो जाता है। स्त्री के मन की तो गहराई इतनी है कि अपने पुत्र को मारने वाले अस्वत्थामा को भी द्रौपती ने छमा कर दिया था ,........ .
अवचेतन मन में कितनी ही कड़वी बाते हो पर अपने फ़र्ज़ को हमेशा ही प्राथमिकता से निभाने वाली महिलाओ के लिये तो शव्द भी काम पद जाये
"कांच नहीं है औरत जो ठोकर से टूट जाएगी ,ये वो कोमल मिट्टी है जो हर साँचे में ढल जाएगी।
परिस्थितयो की आग में तप कर वो पक्की हो जाती है ,टूट कर फिर वो नई शक्ल में आ जाती है "
"महिला दिवस की शुभकामनाऍ "
ये तो हुई बाहर की बाते पर हम यहाँ पर स्त्री के मन से भी परे उसके अवचेतन मन की बात करते है ,जब से दुनिया अस्तित्व में आई तो सबसे पहले कोण आया आदम या हब्बा ये तो कोई खास बात नहीं है शायद दोनों को साथ में प्रभु ने धरती पर भेजा होगा क्योंकि उसको अपनी सृष्टि की रचना में पुरूष के बराबर ही स्त्री के महत्व का भान था। उस परमपिता को कोई संदेह नहीं था अपनी इस अद्भुत रचना पर जो उसकी सृष्टि में बराबर की सहभागी थी और है। हर युग में उसने नारी को हर तरह से सक्षम बनाया है ,नारी को ईश्वर ने अपनी सर्वश्रेष्ठ रचना बताया है। महिलाओ को किसी विशेष दिन में कोई भले ही सम्मान की बात करे पर उस सृष्टि के रचयिता ने एक नारी की कोख़ से जन्म ले लेकर उसको माँ की पदवी दे कर बहुत ही सम्मान दिया है ,उसका कोई मोल नहीं है।
स्त्री का व्यक्तित्व अपने आप में संपुर्ण है उसके अवचेतन में हमेशा ही एक बात रहती है की कैसे अपने परिवार ,समाज ,और देश -दुनिया का भला करू। हर परिस्थिति से उठ कर फिर आगे बढ़ना और सकारत्मकता के साथ हर घटना को सहज रूप से स्वीकारना हर नारी का नैसर्गिक गुण होता है ,महिलाओ की सहज प्रवत्ति है दूसरों की मदद करना। नारी मन के बारे में कवियों को कहने में ही एकअद्भुत रचना का सृजन हो जाता है। स्त्री के मन की तो गहराई इतनी है कि अपने पुत्र को मारने वाले अस्वत्थामा को भी द्रौपती ने छमा कर दिया था ,........ .
अवचेतन मन में कितनी ही कड़वी बाते हो पर अपने फ़र्ज़ को हमेशा ही प्राथमिकता से निभाने वाली महिलाओ के लिये तो शव्द भी काम पद जाये
"कांच नहीं है औरत जो ठोकर से टूट जाएगी ,ये वो कोमल मिट्टी है जो हर साँचे में ढल जाएगी।
परिस्थितयो की आग में तप कर वो पक्की हो जाती है ,टूट कर फिर वो नई शक्ल में आ जाती है "
"महिला दिवस की शुभकामनाऍ "
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