बुधवार, 22 मार्च 2017

MAN KI BAATEN

'मन को समझना बड़ा मुश्किल है ,कब खुश हो जाये कब उदास यूं ही मुस्कुराने लगे या गाने लगे जब सारा जग किसी समस्या से परेशान हो  और आपका  मन  नाचने को करे तो क्या कीजिये इस दिल का , जब आप किसी की उदासी में शामिल हो और आपका चेहरे पर बार -बार मुस्कान बिखर जाये और आप अपने को संयत करने की लाख कोशिश करो पर आप का मन आपकी एक न सुने  "      .........  बस  यही वो स्थिति है  जब आप खुद के बारे में जानने की हर संभव प्रयास तो करते हो पर जान नहीं पाते  और  बस एक कोना ढूढ़ कर बस बैठना चाहते हो जहाँ आप अपने आप को समझने की पुरजोर कोशिश  करते  हुए भी अपने को पा नहीं पाते और मन -मस्तिष्क में  जोरदार  टकराव होता कि क्या दुनिया में सब अच्छा है  या  दुनिया  में  सब जैसा हम देखते वैसा ही दिखता  है  बस इसी कश्मकश में दिन -रात बीतते जाते है जिंदगी की रफ़्तार अपनी गति से  चलती जाती है  ,और मन की गति उससे भी दुगनी या दस गुनीगति  से चलता जाता है हम उदास होते ही तो मन भविष्य में ख़ुशी खोजता है जब  भविष्य में कठिनाई दिखाई देती है  तो भूतकाल की किसी ख़ुशी को पकड़ कर खुश हो लेता  है  यही तो   मन  की  अपनी दुनिया है  बस उसको कोई हद में रोक नहीं सकता। ........
                       यही बात तो मन की शायद अनोखी है जब लगता है की ,सब कुछ ख़त्म होने वाला है तब मन के किसी कोने से आवाज़ आती है सब ठीक हो जाएगा। ... और फिर जिंदगी अपनी  रफ़्तार  से चल पड़ती है और मन किसी कोने में  दुबक कर  जिंदगी  की दौड़ में हमे भागते देखता रहता है ,और  फिर अपनी ही दुनिया में खुश होता रहता है। ....... मन की बातें मन ही जाने  हम तो बस  यूँ ही जिए जाते है।  ........ 

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